श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.3.42

दशम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तयोर्वां पुनरेवाहमदित्यामास कश्यपात्।

उपेन्द्र इति विख्यातो वामनत्वाच्च वामनः॥ ४२

tayorvāṃ punarevāhamadityāmāsa kaśyapāt|

upendra iti vikhyāto vāmanatvācca vāmanaḥ|| 42

अर्थ

फिर दूसरे जन्ममें तुम हुईं अदिति और वसुदेव हुए कश्यप। उस समय भी मैं तुम्हारा पुत्र हुआ। मेरा नाम था ‘उपेन्द्र’। शरीर छोटा होनेके कारण लोग मुझे ‘वामन’ भी कहते थे॥ ४२॥

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