श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.3.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

अथैनमात्मजं वीक्ष्य महापुरुषलक्षणम्।

देवकी तमुपाधावत् कंसाद् भीता शुचिस्मिता॥ २३

athainamātmajaṃ vīkṣya mahāpuruṣalakṣaṇam|

devakī tamupādhāvat kaṃsād bhītā śucismitā|| 23

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! इधर देवकीने देखा कि मेरे पुत्रमें तो पुरुषोत्तम भगवान्‌के सभी लक्षण मौजूद हैं। पहले तो उन्हें कंससे कुछ भय मालूम हुआ, परन्तु फिर वे बड़े पवित्र भावसे मुसकराती हुई स्तुति करने लगीं॥ २३॥

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