श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.29.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

मातरः पितरः पुत्रा भ्रातरः पतयश्‍च वः।

विचिन्वन्ति ह्यपश्यन्तो मा कृढ्वं बन्धुसाध्वसम्॥ २०

mātaraḥ pitaraḥ putrā bhrātaraḥ patayaśca vaḥ|

vicinvanti hyapaśyanto mā kṛḍhvaṃ bandhusādhvasam|| 20

अर्थ

तुम्हें न देखकर तुम्हारे माँ-बाप, पति-पुत्र और भाई-बन्धु ढूँढ़ रहे होंगे। उन्हें भयमें न डालो॥ २०॥✎ 1818

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1818 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): सेवा → और सतियोंकी सेवा

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