तुम्हें न देखकर तुम्हारे माँ-बाप, पति-पुत्र और भाई-बन्धु ढूँढ़ रहे होंगे। उन्हें भयमें न डालो॥ २०॥✎ 1818
मातरः पितरः पुत्रा भ्रातरः पतयश्च वः।
विचिन्वन्ति ह्यपश्यन्तो मा कृढ्वं बन्धुसाध्वसम्॥ २०
तुम्हें न देखकर तुम्हारे माँ-बाप, पति-पुत्र और भाई-बन्धु ढूँढ़ रहे होंगे। उन्हें भयमें न डालो॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.29.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 311) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/29/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1818 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): सेवा → और सतियोंकी सेवा