परीक्षित्! तुम्हारे-जैसे परम भागवत भगवान्का रहस्य जाननेवाले भक्तको श्रीकृष्णके सम्बन्धमें ऐसा सन्देह नहीं करना चाहिये। योगेश्वरोंके भी ईश्वर अजन्मा भगवान्के लिये भी यह कोई आश्चर्यकी बात है? अरे! उनके संकल्पमात्रसे—भौंहोंके इशारेसे सारे जगत्का परम कल्याण हो सकता है॥ १६॥✎ 887888
न चैवं विस्मयः कार्यो भवता भगवत्यजे।
योगेश्वरेश्वरे कृष्णे यत एतद् विमुच्यते॥ १६
परीक्षित्! तुम्हारे-जैसे परम भागवत भगवान्का रहस्य जाननेवाले भक्तको श्रीकृष्णके सम्बन्धमें ऐसा सन्देह नहीं करना चाहिये। योगेश्वरोंके भी ईश्वर अजन्मा भगवान्के लिये भी यह कोई आश्चर्यकी बात है? अरे! उनके संकल्पमात्रसे—भौंहोंके इशारेसे सारे जगत्का परम कल्याण हो सकता है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.29.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 310) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/29/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)