श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.28.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

एवं प्रसादितः कृष्णो भगवानीश्‍वरेश्‍वरः।

आदायागात् स्वपितरं बन्धूनां चावहन् मुदम्॥ ९

evaṃ prasāditaḥ kṛṣṇo bhagavānīśvareśvaraḥ|

ādāyāgāt svapitaraṃ bandhūnāṃ cāvahan mudam|| 9

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण ब्रह्मा आदि ईश्‍वरोंके भी ईश्‍वर हैं। लोकपाल वरुणने इस प्रकार उनकी स्तुति करके उन्हें प्रसन्‍न किया। इसके बाद भगवान् अपने पिता नन्दजीको लेकर व्रजमें चले आये और व्रजवासी भाई-बन्धुओंको आनन्दित किया॥ ९॥

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