उस समय तो यह एक ही वर्षका था, जब दैत्य बवंडरके रूपमें इसे बैठे-बैठे आकाशमें उड़ा ले गया था। तुम सब जानते ही हो कि इसने उस तृणावर्त दैत्यको गला घोंटकर मार डाला॥ ६॥
एकहायन आसीनो ह्रियमाणो विहायसा।
दैत्येन यस्तृणावर्तमहन् कण्ठग्रहातुरम्॥ ६
उस समय तो यह एक ही वर्षका था, जब दैत्य बवंडरके रूपमें इसे बैठे-बैठे आकाशमें उड़ा ले गया था। तुम सब जानते ही हो कि इसने उस तृणावर्त दैत्यको गला घोंटकर मार डाला॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.26.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 298) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/26/6/