श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.26.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

वर्णास्त्रयः किलास्यासन् गृह्णतोऽनुयुगं तनूः।

शुक्लो रक्तस्तथा पीत इदानीं कृष्णतां गतः॥ १६

varṇāstrayaḥ kilāsyāsan gṛhṇato'nuyugaṃ tanūḥ|

śuklo raktastathā pīta idānīṃ kṛṣṇatāṃ gataḥ|| 16

अर्थ

‘तुम्हारा यह बालक प्रत्येक युगमें शरीर ग्रहण करता है। विभिन्‍न युगोंमें इसने श्‍वेत, रक्त और पीत—ये भिन्‍न-भिन्‍न रंग स्वीकार किये थे। इस बार यह कृष्णवर्ण हुआ है॥ १६॥

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