‘मेरे प्यारे गोपो! अब तुमलोग निडर हो जाओ और अपनी स्त्रियों, गोधन तथा बच्चोंके साथ बाहर निकल आओ। देखो, अब आँधी-पानी बंद हो गया तथा नदियोंका पानी भी उतर गया’॥ २६॥✎ 885
निर्यात त्यजत त्रासं गोपाः सस्त्रीधनार्भकाः।
उपारतं वातवर्षं व्युदप्रायाश्च निम्नगाः॥ २६
‘मेरे प्यारे गोपो! अब तुमलोग निडर हो जाओ और अपनी स्त्रियों, गोधन तथा बच्चोंके साथ बाहर निकल आओ। देखो, अब आँधी-पानी बंद हो गया तथा नदियोंका पानी भी उतर गया’॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 296) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/25/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)