भगवान् श्रीकृष्णने सब व्रजवासियोंके देखते-देखते भूख-प्यासकी पीड़ा, आराम-विश्रामकी आवश्यकता आदि सब कुछ भुलाकर सात दिनतक लगातार उस पर्वतको उठाये रखा। वे एक डग भी वहाँसे इधर-उधर नहीं हुए॥ २३॥✎ 885
क्षुत्तृड्व्यथां सुखापेक्षां हित्वा तैर्व्रजवासिभिः।
वीक्ष्यमाणो दधावद्रिं सप्ताहं नाचलत् पदात्॥ २३
भगवान् श्रीकृष्णने सब व्रजवासियोंके देखते-देखते भूख-प्यासकी पीड़ा, आराम-विश्रामकी आवश्यकता आदि सब कुछ भुलाकर सात दिनतक लगातार उस पर्वतको उठाये रखा। वे एक डग भी वहाँसे इधर-उधर नहीं हुए॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 296) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/25/23/