श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.25.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

तत्र प्रतिविधिं सम्यगात्मयोगेन साधये।

लोकेशमानिनां मौढ्याद्धरिष्ये श्रीमदं तमः॥ १६

tatra pratividhiṃ samyagātmayogena sādhaye|

lokeśamānināṃ mauḍhyāddhariṣye śrīmadaṃ tamaḥ|| 16

अर्थ

अच्छा, मैं अपनी योगमायासे इसका भलीभाँति जवाब दूँगा। ये मूर्खतावश अपनेको लोक-पाल मानते हैं, इनके ऐश्‍वर्य और धनका घमण्ड तथा अज्ञान मैं चूर-चूर कर दूँगा॥ १६॥✎ 2081 2082

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #2081 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि
  • #2082 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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