और भी, चाण्डाल, पतित तथा कुत्तोंतकको यथायोग्य वस्तुएँ देकर गायोंको चारा दिया जाय और फिर गिरिराजको भोग लगाया जाय॥ २८॥✎ 1667
अन्येभ्यश्चाश्वचाण्डालपतितेभ्यो यथार्हतः।
यवसं च गवां दत्त्वा गिरये दीयतां बलिः॥ २८
और भी, चाण्डाल, पतित तथा कुत्तोंतकको यथायोग्य वस्तुएँ देकर गायोंको चारा दिया जाय और फिर गिरिराजको भोग लगाया जाय॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.24.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 292) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/24/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)