श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

रजसा चोदिता मेघा वर्षन्त्यम्बूनि सर्वतः।

प्रजास्तैरेव सिद्ध्यन्ति महेन्द्रः किं करिष्यति॥ २३

rajasā coditā meghā varṣantyambūni sarvataḥ|

prajāstaireva siddhyanti mahendraḥ kiṃ kariṣyati|| 23

अर्थ

उसी रजोगुणकी प्रेरणासे मेघगण सब कहीं जल बरसाते हैं। उसीसे अन्‍न और अन्‍नसे ही सब जीवोंकी जीविका चलती है। इसमें भला इन्द्रका क्या लेना-देना है? वह भला, क्या कर सकता है?॥ २३॥

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