श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.48

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

स एष भगवान् साक्षाद् विष्णुर्योगेश्‍वरेश्‍वरः।

जातो यदुष्वित्यशृण्म ह्यपि मूढा न विद्महे॥ ४८

sa eṣa bhagavān sākṣād viṣṇuryogeśvareśvaraḥ|

jāto yaduṣvityaśṛṇma hyapi mūḍhā na vidmahe|| 48

अर्थ

वे ही योगेश्‍वरोंके भी ईश्‍वर भगवान् विष्णु स्वयं श्रीकृष्णके रूपमें यदुवंशियोंमें अवतीर्ण हुए हैं, यह बात हमने सुन रखी थी; परन्तु हम इतने मूढ हैं कि उन्हें पहचान न सके॥ ४८॥

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