caturvidhenāśayitvā svayaṃ ca bubhuje prabhuḥ|| 35
अर्थ
इधर भगवान् श्रीकृष्णने ब्राह्मणियोंके लाये हुए उस चार प्रकारके अन्नसे पहले ग्वाल-बालोंको भोजन कराया और फिर उन्होंने स्वयं भी भोजन किया॥ ३५॥
भगवानपि गोविन्दस्तेनैवान्नेन गोपकान्।
चतुर्विधेनाशयित्वा स्वयं च बुभुजे प्रभुः॥ ३५
इधर भगवान् श्रीकृष्णने ब्राह्मणियोंके लाये हुए उस चार प्रकारके अन्नसे पहले ग्वाल-बालोंको भोजन कराया और फिर उन्होंने स्वयं भी भोजन किया॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.23.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 286) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/23/35/