श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

प्रयात देवयजनं ब्राह्मणा ब्रह्मवादिनः।

सत्रमांगिरसं नाम ह्यासते स्वर्गकाम्यया॥ ३

prayāta devayajanaṃ brāhmaṇā brahmavādinaḥ|

satramāṃgirasaṃ nāma hyāsate svargakāmyayā|| 3

अर्थ

‘मेरे प्यारे मित्रो! यहाँसे थोड़ी ही दूरपर वेदवादी ब्राह्मण स्वर्गकी कामनासे आंगिरस नामका यज्ञ कर रहे हैं। तुम उनकी यज्ञशालामें जाओ॥ ३॥

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