श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

स्वागतं१ वो महाभागा आस्यतां करवाम किम्।

यन्‍नो दिदृक्षया२ प्राप्ता उपपन्‍नमिदं हि वः॥ २५

svāgataṃ vo mahābhāgā āsyatāṃ karavāma kim|

yanno didṛkṣayā prāptā upapannamidaṃ hi vaḥ|| 25

अर्थ

भगवान्‌ने कहा—‘महाभाग्यवती देवियो! तुम्हारा स्वागत है। आओ, बैठो। कहो, हम तुम्हारा क्या स्वागत करें? तुमलोग हमारे दर्शनकी इच्छासे यहाँ आयी हो, यह तुम्हारे-जैसे प्रेमपूर्ण हृदयवालोंके योग्य ही है॥ २५॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्राचीन प्रतिमें ‘स्वागतं वो......’ इत्यादि श्‍लोकके पहले ‘श्रीभगवानुवाच’ इतना अधिक पाठ है।
     

    (मुद्रित पृष्ठ 284)
  2. २

    याभ्येता।

    (मुद्रित पृष्ठ 284)

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