श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

यमुनोपवनेऽशोकनवपल्लवमण्डिते ।

विचरन्तं वृतं गोपैः साग्रजं ददृशुः स्त्रियः॥ २१

yamunopavane'śokanavapallavamaṇḍite |

vicarantaṃ vṛtaṃ gopaiḥ sāgrajaṃ dadṛśuḥ striyaḥ|| 21

अर्थ

ब्राह्मणपत्‍नियोंने जाकर देखा कि यमुनाके तटपर नये-नये कोंपलोंसे शोभायमान अशोक-वनमें ग्वाल-बालोंसे घिरे हुए बलरामजीके साथ श्रीकृष्ण इधर-उधर घूम रहे हैं॥ २१॥

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