श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

श्रुत्वाच्युतमुपायातं नित्यं तद्दर्शनोत्सुकाः।

तत्कथाक्षिप्तमनसो बभूवुर्जातसम्भ्रमाः॥ १८

śrutvācyutamupāyātaṃ nityaṃ taddarśanotsukāḥ|

tatkathākṣiptamanaso babhūvurjātasambhramāḥ|| 18

अर्थ

परीक्षित्! वे ब्राह्मणियाँ बहुत दिनोंसे भगवान्‌की मनोहर लीलाएँ सुनती थीं। उनका मन उनमें लग चुका था। वे सदा-सर्वदा इस बातके लिये उत्सुक रहतीं कि किसी प्रकार श्रीकृष्णके दर्शन हो जायँ। श्रीकृष्णके आनेकी बात सुनते ही वे उतावली हो गयीं॥ १८॥

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