भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि उन कुमारियोंने उनके चरणकमलोंके स्पर्शकी कामनासे ही व्रत धारण किया है और उनके जीवनका यही एकमात्र संकल्प है। तब गोपियोंके प्रेमके अधीन होकर ऊखल-तकमें बँध जानेवाले भगवान्ने उनसे कहा—॥ २४॥
तासां विज्ञाय भगवान् स्वपादस्पर्शकाम्यया।
धृतव्रतानां संकल्पमाह दामोदरोऽबलाः॥ २४
भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि उन कुमारियोंने उनके चरणकमलोंके स्पर्शकी कामनासे ही व्रत धारण किया है और उनके जीवनका यही एकमात्र संकल्प है। तब गोपियोंके प्रेमके अधीन होकर ऊखल-तकमें बँध जानेवाले भगवान्ने उनसे कहा—॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.22.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 273) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/22/24/