श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.22.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

तास्तथावनता दृष्ट्वा भगवान् देवकीसुतः।

वासांसि ताभ्यः प्रायच्छत् करुणस्तेन तोषितः॥ २१

tāstathāvanatā dṛṣṭvā bhagavān devakīsutaḥ|

vāsāṃsi tābhyaḥ prāyacchat karuṇastena toṣitaḥ|| 21

अर्थ

जब यशोदानन्दन भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि सब-की-सब कुमारियाँ मेरी आज्ञाके अनुसार प्रणाम कर रही हैं, तब वे बहुत ही प्रसन्‍न हुए। उनके हृदयमें करुणा उमड़ आयी और उन्होंने उनके वस्त्र दे दिये॥ २१॥

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