श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.20.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

ततः प्रावर्तत प्रावृट् सर्वसत्त्वसमुद्भवा।

विद्योतमानपरिधिर्विस्फूर्जितनभस्तला ॥ ३

tataḥ prāvartata prāvṛṭ sarvasattvasamudbhavā|

vidyotamānaparidhirvisphūrjitanabhastalā || 3

अर्थ

इसके बाद वर्षा ऋतुका शुभागमन हुआ। इस ऋतुमें सभी प्रकारके प्राणियोंकी बढ़ती हो जाती है। उस समय सूर्य और चन्द्रमापर बार-बार प्रकाशमय मण्डल बैठने लगे। बादल, वायु, चमक, कड़क आदिसे आकाश क्षुब्ध-सा दीखने लगा॥ ३॥✎ 1980 2078

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1980 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): अपनी → अपने
  • #2078 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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