॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.2.5
सप्तमो वैष्णवं धाम यमनन्तं प्रचक्षते।
गर्भो बभूव देवक्या हर्षशोकविवर्धनः॥ ५
saptamo vaiṣṇavaṃ dhāma yamanantaṃ pracakṣate|
garbho babhūva devakyā harṣaśokavivardhanaḥ|| 5
अर्थ
कुछ लोग ऊपर-ऊपरसे उसके मनके अनुसार काम करते हुए उसकी सेवामें लगे रहे। जब कंसने एक-एक करके देवकीके छः बालक मार डाले, तब देवकीके सातवें गर्भमें भगवान्के अंशस्वरूप श्रीशेषजी* जिन्हें अनन्त भी कहते हैं—पधारे । आनन्दस्वरूप शेषजीके गर्भमें आनेके कारण देवकीको स्वा-भाविक ही हर्ष हुआ । परन्तु कंस शायद इसे भी मार डाले, इस भयसे उनका शोक भी बढ़ गया॥ ४-५॥✎ 1652
टिप्पणियाँ
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शेष भगवान्ने विचार किया कि ‘रामावतारमें मैं छोटा भाई बना, इसीसे मुझे बड़े भाईकी आज्ञा माननी पड़ी और वन जानेसे मैं उन्हें रोक नहीं सका। श्रीकृष्णावतारमें मैं बड़ा भाई बनकर भगवान्की अच्छी सेवा कर सकूँगा। इसलिये वे श्रीकृष्णसे पहले ही गर्भमें आ गये।