श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.2.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

न तेऽभवस्येश भवस्य कारणं

विना विनोदं बत तर्कयामहे।

भवो निरोधः स्थितिरप्यविद्यया

कृता यतस्त्वय्यभयाश्रयात्मनि॥ ३९

na te'bhavasyeśa bhavasya kāraṇaṃ

vinā vinodaṃ bata tarkayāmahe|

bhavo nirodhaḥ sthitirapyavidyayā

kṛtā yatastvayyabhayāśrayātmani|| 39

अर्थ

प्रभो! आप अजन्मा हैं। यदि आपके जन्मके कारणके सम्बन्धमें हम कोई तर्क ना करें, तो यही कह सकते हैं कि यह आपका एक लीला-विनोद है । ऐसा कहनेका कारण यह है कि आप तो द्वैतके लेशसे रहित सर्वाधिष्ठानस्वरूप हैं और इस जगत‍्की उत्पत्ति, स्थिति तथा प्रलय अज्ञानके द्वारा आपमें आरोपित हैं॥ ३९॥

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