श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.18.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अविषह्यं मन्यमानः कृष्णं दानवपुंगवः।

वहन् द्रुततरं प्रागादवरोहणतः परम्॥ २५

aviṣahyaṃ manyamānaḥ kṛṣṇaṃ dānavapuṃgavaḥ|

vahan drutataraṃ prāgādavarohaṇataḥ param|| 25

अर्थ

दानवपुंगव प्रलम्बने देखा कि श्रीकृष्ण तो बड़े बलवान् हैं, उन्हें मैं नहीं हरा सकूँगा। अतः वह उन्हींके पक्षमें हो गया और बलरामजीको लेकर फुर्तीसे भाग चला, और पीठपरसे उतारनेके लिये जो स्थान नियत था, उससे आगे निकल गया॥ २५॥

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