श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.18.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

वहन्तो वाह्यमानाश्‍च चारयन्तश्‍च गोधनम्।

भाण्डीरकं नाम वटं जग्मुः कृष्णपुरोगमाः॥ २२

vahanto vāhyamānāśca cārayantaśca godhanam|

bhāṇḍīrakaṃ nāma vaṭaṃ jagmuḥ kṛṣṇapurogamāḥ|| 22

अर्थ

इस प्रकार एक-दूसरेकी पीठपर चढ़ते-चढ़ाते श्रीकृष्ण आदि ग्वालबाल गौएँ चराते हुए भाण्डीर नामक वटके पास पहुँच गये॥ २२॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें