इस प्रकार एक-दूसरेकी पीठपर चढ़ते-चढ़ाते श्रीकृष्ण आदि ग्वालबाल गौएँ चराते हुए भाण्डीर नामक वटके पास पहुँच गये॥ २२॥
वहन्तो वाह्यमानाश्च चारयन्तश्च गोधनम्।
भाण्डीरकं नाम वटं जग्मुः कृष्णपुरोगमाः॥ २२
इस प्रकार एक-दूसरेकी पीठपर चढ़ते-चढ़ाते श्रीकृष्ण आदि ग्वालबाल गौएँ चराते हुए भाण्डीर नामक वटके पास पहुँच गये॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.18.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 255) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/18/22/