श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.18.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

पशूंश्‍चारयतोर्गोपैस्तद्वने रामकृष्णयोः।

गोपरूपी प्रलम्बोऽगादसुरस्तज्जिहीर्षया॥ १७

paśūṃścārayatorgopaistadvane rāmakṛṣṇayoḥ|

goparūpī pralambo'gādasurastajjihīrṣayā|| 17

अर्थ

एक दिन जब बलराम और श्रीकृष्ण ग्वालबालोंके साथ उस वनमें गौएँ चरा रहे थे तब ग्वालके वेषमें प्रलम्ब नामका एक असुर आया। उसकी इच्छा थी कि मैं श्रीकृष्ण और बलरामको हर ले जाऊँ॥ १७॥

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