श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.17.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

तं कालियः परं वेद नान्यः कश्‍चन लेलिहः।

अवात्सीद् गरुडाद् भीतः कृष्णेन च विवासितः॥ १२

taṃ kāliyaḥ paraṃ veda nānyaḥ kaścana lelihaḥ|

avātsīd garuḍād bhītaḥ kṛṣṇena ca vivāsitaḥ|| 12

अर्थ

परीक्षित्! महर्षि सौभरिके इस शापकी बात कालिय नागके सिवा और कोई साँप नहीं जानता था। इसलिये वह गरुडके भयसे वहाँ रहने लगा था और अब भगवान् श्रीकृष्णने उसे निर्भय करके वहाँसे रमणक द्वीपमें भेज दिया॥ १२॥

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