॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.16.12
अथ व्रजे महोत्पातास्त्रिविधा ह्यतिदारुणाः।
उत्पेतुर्भुवि दिव्यात्मन्यासन्नभयशंसिनः॥ १२
atha vraje mahotpātāstrividhā hyatidāruṇāḥ|
utpeturbhuvi divyātmanyāsannabhayaśaṃsinaḥ|| 12
अर्थ
इधर व्रजमें पृथ्वी, आकाश और शरीरोंमें बड़े भयंकर-भयंकर तीनों प्रकारके उत्पात उठ खड़े हुए, जो इस बातकी सूचना दे रहे थे कि बहुत ही शीघ्र कोई अशुभ घटना घटनेवाली है॥ १२॥