भगवान् श्रीकृष्ण इस प्रकार वृन्दावनमें अनेकों लीलाएँ करते। एक दिन अपने सखा ग्वालबालोंके साथ वे यमुना-तटपर गये। राजन्! उस दिन बलरामजी उनके साथ नहीं थे॥ ४७॥✎ 2074
एवं स भगवान् कृष्णो वृन्दावनचरः क्वचित्।
ययौ राममृते राजन् कालिन्दीं सखिभिर्वृतः॥ ४७
भगवान् श्रीकृष्ण इस प्रकार वृन्दावनमें अनेकों लीलाएँ करते। एक दिन अपने सखा ग्वालबालोंके साथ वे यमुना-तटपर गये। राजन्! उस दिन बलरामजी उनके साथ नहीं थे॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.15.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 237) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/15/47/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)