श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

राम राम महाबाहो कृष्ण दुष्टनिबर्हण।

इतोऽविदूरे सुमहद् वनं तालालिसंकुलम्॥ २१

rāma rāma mahābāho kṛṣṇa duṣṭanibarhaṇa|

ito'vidūre sumahad vanaṃ tālālisaṃkulam|| 21

अर्थ

‘हमलोगोंको सर्वदा सुख पहुँचानेवाले बलरामजी! आपके बाहुबलकी तो कोई थाह ही नहीं है। हमारे मनमोहन श्रीकृष्ण! दुष्टोंको नष्ट कर डालना तो तुम्हारा स्वभाव ही है। यहाँसे थोड़ी ही दूरपर एक बड़ा भारी वन है। बस, उसमें पाँत-के-पाँत ताड़के वृक्ष भरे पड़े हैं॥ २१॥

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