श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

अन्ये तदनुरूपाणि मनोज्ञानि महात्मनः।

गायन्ति स्म महाराज स्नेहक्लिन्‍नधियः शनैः॥ १८

anye tadanurūpāṇi manojñāni mahātmanaḥ|

gāyanti sma mahārāja snehaklinnadhiyaḥ śanaiḥ|| 18

अर्थ

किसी-किसीके हृदयमें प्रेमकी धारा उमड़ आती तो वह धीरे-धीरे उदारशिरोमणि परममनस्वी श्रीकृष्णकी लीलाओंके अनुरूप उनके मनको प्रिय लगनेवाले मनोहर गीत गाने लगता॥ १८॥

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