॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.15.13
चकोरक्रौञ्चचक्राह्वभारद्वाजांश्च बर्हिणः।
अनुरौति स्म सत्त्वानां भीतवद् व्याघ्रसिंहयोः॥ १३
cakorakrauñcacakrāhvabhāradvājāṃśca barhiṇaḥ|
anurauti sma sattvānāṃ bhītavad vyāghrasiṃhayoḥ|| 13
अर्थ
कभी चकोर, क्रौंच (कराँकुल), चकवा, भरदूल और मोर आदि पक्षियोंकी-सी बोली बोलते तो कभी बाघ, सिंह आदिकी गर्जनासे डरे हुए जीवोंके समान स्वयं भी भयभीतकी-सी लीला करते॥ १३॥