तब मेरी मायासे मोहित ग्वालबाल और बछड़ोंके अतिरिक्त ये उतने ही दूसरे बालक तथा बछड़े कहाँसे आ गये, जो एक सालसे भगवान्के साथ खेल रहे हैं?॥ ४२॥
इत एतेऽत्र कुत्रत्या मन्मायामोहितेतरे।
तावन्त एव तत्राब्दं क्रीडन्तो विष्णुना समम्॥ ४२
तब मेरी मायासे मोहित ग्वालबाल और बछड़ोंके अतिरिक्त ये उतने ही दूसरे बालक तथा बछड़े कहाँसे आ गये, जो एक सालसे भगवान्के साथ खेल रहे हैं?॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 216) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/13/42/