श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.42

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

इत एतेऽत्र कुत्रत्या मन्मायामोहितेतरे।

तावन्त एव तत्राब्दं क्रीडन्तो विष्णुना समम्॥ ४२

ita ete'tra kutratyā manmāyāmohitetare|

tāvanta eva tatrābdaṃ krīḍanto viṣṇunā samam|| 42

अर्थ

तब मेरी मायासे मोहित ग्वालबाल और बछड़ोंके अतिरिक्त ये उतने ही दूसरे बालक तथा बछड़े कहाँसे आ गये, जो एक सालसे भगवान्‌के साथ खेल रहे हैं?॥ ४२॥

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