श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

समेत्य गावोऽधो वत्सान् वत्सवत्योऽप्यपाययन्।

गिलन्त्य इव चांगानि लिहन्त्यः स्वौधसं पयः॥ ३१

sametya gāvo'dho vatsān vatsavatyo'pyapāyayan|

gilantya iva cāṃgāni lihantyaḥ svaudhasaṃ payaḥ|| 31

अर्थ

जिन गौओंके और भी बछड़े हो चुके थे, वे भी गोवर्धनके नीचे अपने पहले बछड़ोंके पास दौड़ आयीं और उन्हें स्नेहवश अपने-आप बहता हुआ दूध पिलाने लगीं। उस समय वे अपने बच्चोंका एक-एक अंग ऐसे चावसे चाट रही थीं, मानो उन्हें अपने पेटमें रख लेंगी॥ ३१॥

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