श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

ततो विदूराच्चरतो गावो वत्सानुपव्रजम्।

गोवर्धनाद्रिशिरसि चरन्त्यो ददृशुस्तृणम्॥ २९

tato vidūrāccarato gāvo vatsānupavrajam|

govardhanādriśirasi carantyo dadṛśustṛṇam|| 29

अर्थ

उस समय गौएँ गोवर्धनकी चोटीपर घास चर रही थीं। वहाँसे उन्होंने व्रजके पास ही घास चरते हुए बहुत दूर अपने बछड़ोंको देखा॥ २९॥

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