उस समय गौएँ गोवर्धनकी चोटीपर घास चर रही थीं। वहाँसे उन्होंने व्रजके पास ही घास चरते हुए बहुत दूर अपने बछड़ोंको देखा॥ २९॥
ततो विदूराच्चरतो गावो वत्सानुपव्रजम्।
गोवर्धनाद्रिशिरसि चरन्त्यो ददृशुस्तृणम्॥ २९
उस समय गौएँ गोवर्धनकी चोटीपर घास चर रही थीं। वहाँसे उन्होंने व्रजके पास ही घास चरते हुए बहुत दूर अपने बछड़ोंको देखा॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 214) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/13/29/