॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.13.14
इत्युक्त्वाद्रिदरीकुञ्जगह्वरेष्वात्मवत्सकान्।
विचिन्वन् भगवान् कृष्णः सपाणिकवलो ययौ॥ १४
ityuktvādridarīkuñjagahvareṣvātmavatsakān|
vicinvan bhagavān kṛṣṇaḥ sapāṇikavalo yayau|| 14
अर्थ
ग्वालबालोंसे इस प्रकार कहकर भगवान् श्रीकृष्ण हाथमें दही-भातका कौर लिये ही पहाड़ों, गुफाओं, कुंजों एवं अन्यान्य भयंकर स्थानोंमें अपने तथा साथियोंके बछड़ोंको ढूँढ़ने चल दिये॥ १४॥