श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.55

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

अहो बतास्य बालस्य बहवो मृत्यवोऽभवन्।

अप्यासीद् विप्रियं तेषां कृतं पूर्वं यतो भयम्॥ ५५

aho batāsya bālasya bahavo mṛtyavo'bhavan|

apyāsīd vipriyaṃ teṣāṃ kṛtaṃ pūrvaṃ yato bhayam|| 55

अर्थ

वे आपसमें कहने लगे—‘हाय! हाय!! यह कितने आश्‍चर्यकी बात है। इस बालकको कई बार मृत्युके मुँहमें जाना पड़ा। परन्तु जिन्होंने इसका अनिष्ट करना चाहा, उन्हींका अनिष्ट हुआ। क्योंकि उन्होंने पहलेसे दूसरोंका अनिष्ट किया था॥ ५५॥

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