श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.47

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

ते तत्र ददृशुर्बाला महासत्त्वमवस्थितम्।

तत्रसुर्वज्रनिर्भिन्‍नं गिरेः शृंगमिव च्युतम्॥ ४७

te tatra dadṛśurbālā mahāsattvamavasthitam|

tatrasurvajranirbhinnaṃ gireḥ śṛṃgamiva cyutam|| 47

अर्थ

ग्वालबालोंने देखा कि वहाँ एक बहुत बड़ा जीव बैठा हुआ है। वह ऐसा मालूम पड़ता था, मानो इन्द्रके वज्रसे कटकर कोई पहाड़का टुकड़ा गिरा हुआ है॥ ४७॥

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