श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.42

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तं वत्सरूपिणं वीक्ष्य वत्सयूथगतं हरिः।

दर्शयन् बलदेवाय शनैर्मुग्ध इवासदत्॥ ४२

taṃ vatsarūpiṇaṃ vīkṣya vatsayūthagataṃ hariḥ|

darśayan baladevāya śanairmugdha ivāsadat|| 42

अर्थ

भगवान्‌ने देखा कि वह बनावटी बछड़ेका रूप धारणकर बछड़ोंके झुंडमें मिल गया है। वे आँखोंके इशारेसे बलरामजीको दिखाते हुए धीरे-धीरे उसके पास पहुँच गये। उस समय ऐसा जान पड़ता था, मानो वे दैत्यको तो पहचानते नहीं और उस हट्टे-कट्टे सुन्दर बछड़ेपर मुग्ध हो गये हैं॥ ४२॥

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