श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

बाला ऊचुरनेनेति तिर्यग्गतमुलूखलम्।

विकर्षता मध्यगेन पुरुषावप्यचक्ष्महि॥ ४

bālā ūcuraneneti tiryaggatamulūkhalam|

vikarṣatā madhyagena puruṣāvapyacakṣmahi|| 4

अर्थ

वहाँ कुछ बालक खेल रहे थे। उन्होंने कहा—‘अरे, इसी कन्हैयाका तो काम है। यह दोनों वृक्षोंके बीचमेंसे होकर निकल रहा था। ऊखल तिरछा हो जानेपर दूसरी ओरसे इसने उसे खींचा और वृक्ष गिर पड़े। हमने तो इनमेंसे निकलते हुए दो पुरुष भी देखे हैं॥ ४॥

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