श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

गोधनानि पुरस्कृत्य शृंगाण्यापूर्य सर्वतः।

तूर्यघोषेण महता ययुः सहपुरोहिताः॥ ३२

godhanāni puraskṛtya śṛṃgāṇyāpūrya sarvataḥ|

tūryaghoṣeṇa mahatā yayuḥ sahapurohitāḥ|| 32

अर्थ

उन्होंने गौ और बछड़ोंको तो सबसे आगे कर लिया और उनके पीछे-पीछे सिंगी और तुरही जोर-जोरसे बजाते हुए चले। उनके साथ ही-साथ पुरोहितलोग भी चल रहे थे॥ ३२॥

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