यमलार्जुन वृक्षोंके गिरनेके समय उनके बीचमें आकर भी यह या और कोई बालक न मरा। इससे भी यही समझना चाहिये कि भगवान्ने हमारी रक्षा की॥ २६॥
यन्न म्रियेत द्रुमयोरन्तरं प्राप्य बालकः।
असावन्यतमो वापि तदप्यच्युतरक्षणम्॥ २६
यमलार्जुन वृक्षोंके गिरनेके समय उनके बीचमें आकर भी यह या और कोई बालक न मरा। इससे भी यही समझना चाहिये कि भगवान्ने हमारी रक्षा की॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 199) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/11/26/