श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.10.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

कृष्ण कृष्ण महायोगिंस्त्वमाद्यः पुरुषः परः।

व्यक्ताव्यक्तमिदं विश्‍वं रूपं ते ब्राह्मणा विदुः॥ २९

kṛṣṇa kṛṣṇa mahāyogiṃstvamādyaḥ puruṣaḥ paraḥ|

vyaktāvyaktamidaṃ viśvaṃ rūpaṃ te brāhmaṇā viduḥ|| 29

अर्थ

उन्होंने कहा—सच्चिदानन्दस्वरूप! सबको अपनी ओर आकर्षित करनेवाले परम योगेश्‍वर श्रीकृष्ण! आप प्रकृतिसे अतीत स्वयं पुरुषोत्तम हैं। वेदज्ञ ब्राह्मण यह बात जानते हैं कि यह व्यक्त और अव्यक्त सम्पूर्ण जगत् आपका ही रूप है॥ २९॥

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