श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.10.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

इत्यन्तरेणार्जुनयोः कृष्णस्तु यमयोर्ययौ।

आत्मनिर्वेशमात्रेण तिर्यग्गतमुलूखलम्॥ २६

ityantareṇārjunayoḥ kṛṣṇastu yamayoryayau|

ātmanirveśamātreṇa tiryaggatamulūkhalam|| 26

अर्थ

यह विचार करके भगवान् श्रीकृष्ण दोनों वृक्षोंके बीचमें घुस गये†। वे तो दूसरी ओर निकल गये, परन्तु ऊखल टेढ़ा होकर अटक गया॥ २६॥

टिप्पणियाँ

  1. †

    वृक्षोंके बीचमें जानेका आशय यह है कि भगवान् जिसके अन्तर्देशमें प्रवेश करते हैं, उसके जीवनमें क्लेशका लेश भी नहीं रहता। भीतर प्रवेश किये बिना दोनोंका एक साथ उद्धार भी कैसे होता।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 193)

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