श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.1.67

दशम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

मातरं पितरं भ्रातॄन् सर्वांश्‍च सुहृदस्तथा।

घ्नन्ति ह्यसुतृपो लुब्धा राजानः प्रायशो भुवि॥ ६७

mātaraṃ pitaraṃ bhrātṝn sarvāṃśca suhṛdastathā|

ghnanti hyasutṛpo lubdhā rājānaḥ prāyaśo bhuvi|| 67

अर्थ

परीक्षित्! पृथ्वीमें यह बात प्रायः देखी जाती है कि अपने प्राणोंका ही पोषण करनेवाले लोभी राजा अपने स्वार्थके लिये माता-पिता, भाई-बन्धु और अपने अत्यन्त हितैषी इष्ट-मित्रोंकी भी हत्या कर डालते हैं॥ ६७॥

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