देवकी बड़ी सती-साध्वी थी। सारे देवता उसके शरीरमें निवास करते थे। समय आनेपर देवकीके गर्भसे प्रतिवर्ष एक-एक करके आठ पुत्र तथा एक कन्या उत्पन्न हुई॥ ५६॥
अथ काल उपावृत्ते देवकी सर्वदेवता।
पुत्रान् प्रसुषुवे चाष्टौ कन्यां चैवानुवत्सरम्॥ ५६
देवकी बड़ी सती-साध्वी थी। सारे देवता उसके शरीरमें निवास करते थे। समय आनेपर देवकीके गर्भसे प्रतिवर्ष एक-एक करके आठ पुत्र तथा एक कन्या उत्पन्न हुई॥ ५६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.1.56 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 126) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/1/56/