श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.9.22

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तथाप्येकान्तभक्तेषु पश्य भूपा२नुकम्पितम्।

यन्मेऽसूंस्त्यजतः साक्षात्कृष्णो दर्शनमागतः॥ २२

tathāpyekāntabhakteṣu paśya bhūpānukampitam|

yanme'sūṃstyajataḥ sākṣātkṛṣṇo darśanamāgataḥ|| 22

अर्थ

युधिष्ठिर! इस प्रकार सर्वत्र सम होनेपर भी देखो तो सही, वे अपने अनन्यप्रेमी भक्तोंपर कितनी कृपा करते हैं। यही कारण है कि ऐसे समयमें जबकि मैं अपने प्राणोंका त्याग करने जा रहा हूँ, इन भगवान् श्रीकृष्णने मुझे साक्षात् दर्शन दिया है॥ २२॥✎ 1576

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—भूतानु०।

    (मुद्रित पृष्ठ 121)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1576 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: अहंकार-रहित → अहंकाररहित

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