श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.9.19

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

अस्यानुभावं भगवान् वेद गुह्यतमं शिवः।

देवर्षिर्नारदः साक्षाद्भगवान् कपिलो नृप१॥ १९

asyānubhāvaṃ bhagavān veda guhyatamaṃ śivaḥ|

devarṣirnāradaḥ sākṣādbhagavān kapilo nṛpa|| 19

अर्थ

इनका प्रभाव अत्यन्त गूढ़ एवं रहस्यमय है। युधिष्ठिर! उसे भगवान् शंकर, देवर्षि नारद और स्वयं भगवान् कपिल ही जानते हैं॥ १९॥✎ 1576

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—मुनिः।

    (मुद्रित पृष्ठ 121)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1576 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: अहंकार-रहित → अहंकाररहित

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