श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.7

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

आमन्त्र्य पाण्डुपुत्रांश्‍च शैनेयोद्धवसंयुतः।

द्वैपायनादिभिर्विप्रैः पूजितैः प्रतिपूजितः॥ ७

āmantrya pāṇḍuputrāṃśca śaineyoddhavasaṃyutaḥ|

dvaipāyanādibhirvipraiḥ pūjitaiḥ pratipūjitaḥ|| 7

अर्थ

इसके बाद भगवान् श्रीकृष्णने वहाँसे जानेका विचार किया। उन्होंने इसके लिये पाण्डवोंसे विदा ली और व्यास आदि ब्राह्मणोंका सत्कार किया। उन लोगोंने भी भगवान्‌का बड़ा ही सम्मान किया। तदनन्तर सात्यकि और उद्धवके साथ द्वारका जानेके लिये वे रथपर सवार हुए। उसी समय उन्होंने देखा कि उत्तरा भयसे विह्वल होकर सामनेसे दौड़ी चली आ रही है॥ ७-८॥

यह अर्थ श्लोक 7–8 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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