श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.45

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तां बाढमित्युपामन्त्र्य प्रविश्य गजसाह्वयम्।

स्त्रियश्‍च स्वपुरं यास्यन् प्रेम्णा राज्ञा निवारितः॥ ४५

tāṃ bāḍhamityupāmantrya praviśya gajasāhvayam|

striyaśca svapuraṃ yāsyan premṇā rājñā nivāritaḥ|| 45

अर्थ

उन्होंने कुन्तीसे कह दिया—‘अच्छा ठीक है’ और रथके स्थानसे वे हस्तिनापुर लौट आये। वहाँ कुन्ती और सुभद्रा आदि देवियोंसे विदा लेकर जब वे जाने लगे, तब राजा युधिष्ठिरने बड़े प्रेमसे उन्हें रोक लिया॥ ४५॥✎ 70 71

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #70 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #71 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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